किसानों के लिए वरदान समझी जाने वाली गन्ने की फसल इस बार गंभीर पोक्का बोइंग बीमारी की चपेट में है। गन्ने की 0238 प्रजाति में पोक्का बोइंग बीमारी लगने से फसल का उत्पादन गिरने की आशंका जताई गई है। चीनी मिल और किसानों के लिए कई वर्षों से फायदेमंद रही गन्ने की 0238 प्रजाति का रकवा 80 फीसदी से अधिक है। कोरोना से पहले से परेशान किसानों को पोक्का बोइंग बीमारी ने बुरी तरह सकते में डाल दिया है। कृषि वैज्ञानिकों ने भी किसानों से गन्ने की फसल में लगने वाली इस बीमारी के प्रति सचेत किया है।
गन्ना उत्पादन में अग्रणी माने जाने वाले तराई के इस जनपद में हर साल करीब एक लाख हेक्टेयर से अधिक गन्ने की पैदावार होती है। मगर, इसके बावजूद गन्ना किसान अक्सर किसी न किसी मुसीबत से घिरे रहते हैं। कभी मौसम की मार तो कभी भुगतान की समस्या होने के बाद भी किसानों का गन्ने से मोहभंग नहीं हो पा रहा है। इधर, अब गन्ना किसानों को एक नई मुसीबत का सामना करना पड़ रहा है। गन्ने की फसल में फफूंदीजनित पोक्का बोइंग बीमारी लग गई है। खास बात यह है कि यह बीमारी गन्ने की 0238 प्रजाति पर अधिक मार कर रही है। किसान सर्वाधिक इसी प्रजाति के गन्ने का उत्पादन करते हैं। कृषि विभाग के आकंड़ों के मुताबिक गन्ने की 0238 प्रजाति कुल रकवे के करीब 80 फीसदी है। कृषि वैज्ञानिक और प्रगतिशील किसान गन्ने में पोक्का बोइंग बीमारी लगने से चिंतित हैं। प्रगतिशील किसान डॉ. विकास वर्मा का कहना है कि यह बीमारी गन्ने के लिए घातक है। इसमें गन्ने की न केवल वृद्धि रुक जाती है, बल्कि इसकी पत्तियां कुछ समय बाद सूखने लगती हैं। इससे फसल के उत्पादन पर असर पड़ता है। किसान समय रहते इस बीमार से गन्ने की फसल को निजात दिलाएं। अन्यथा, उन्हें भविष्य में गन्ने के उत्पादन में नुकसान उठाना पड़ सकता है।
80 फीसदी रकवे में इसकी फसल, कृषि वैज्ञानिक भी हुए चिंतित पहले पीली और काली होकर सूख जाती हैं पत्तियां, बढ़वार पर भी असर

खेत में खड़ी गन्ने की फसल में बीमारी फैलने के बाद किसान हैं चिंतित। गन्ने फसल में लगी बीमारी को दिखते डॉ. एसएस ढाका और डॉ. विकास वर्मा
