हजारों वर्ष पहले अस्वस्थ होने पर हमारे पूर्वज आयुर्वेद का सहारा लेते थे। धीरे-धीरे चिकित्सा को कई नवीन पद्धतियाँ विकसित हुई। होम्योपैथी भी उनमें से एक हैं। होम्योपैथ की मीठी गोलियों से आपने इंसानी बीमारियों का इलाज तो सुना होगा, लेकिन हम आपको ऐसे चिकित्सक से रूबरू करा रहे हैं जो इन्हीं मीठी गोलियों से न केवल फसलों का इलाज करते हैं, वरन माटी की सेहत का भी ख्याल रखते हैं। शर्त बस इतनी है कि संबंधित किसन को पहले अपने खेतों में रसायनों का प्रयोग नहीं करने का वचन देना होता है। इसके बाद वह किसनों को संबंधित दवाएं निश्शुल्क उपलब्ध कराते हैं। आसपास के जिलों के अलावा अब तक वह गुजरात, मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र, रायपुर, विशाखापत्तनम आदि के हजारों किसानों को अपनी सेवाएं दे चुके हैं।
होम्योपैथी के जरिये फसलों में लगने वाले रोगों का इलाज करते हैं बरेली के डा. विकास वर्मा
गुजरात, मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र, रायपुर व विशाखापट्टनम के हजारों किसानों को बांट चुके दवाएं
शहर के डीडीपुरम निवासे विकास वर्मा पेशे से होम्योपैथिक चिकित्सक हैं। पिछले एक दशक से वह कृषि क्षेत्र में होम्योपैथिक दवाओं की उपयोगिता पर शोध कर रहे हैं। उन्होंने इसके लिए बाकायदा होम्योपैथिक जैविक कृषि फार्म बना रखा है। यहाँ वह फसलों पर होम्योपैथिक दवाओं के प्रयोग के बाद होने वाले प्रभावों का अध्ययन करते हैं। जिस तरह अलग-अलग इंसान व अलग-अलग बीमारियें की दवा अलग होती है, उसी प्रकार भिन्न-भिन्न फसलों में होने वाले अलग-अलग रोगों के लिए डा. विकास ने भी अलग-अलग दवाएं विकसित की हैं।
