कभी-कभारएक छोटी-सी घटना जिंदगी में बहुत बड़े बदलाव की वजह बन जाती है। विकास वर्मा और सुमन वर्मा के होम्योपैथिक डॉक्टर से किसान बनने की कहानी भी कुछ ऐसी ही है। बरोनी के पॉश इलाके में क्लीनिक चला रहे पति-पत्नी घर के बाहरचीमार पड़े नीबू के पौधे को देखकर कुछ देर के लिए ठिठक जाते थे। एक दिन बैठे-बैठे मन में विचार आया कि होम्योपैथी से इनसान टोक ही सकता है तो पेड़-पौधे क्यों नहीं? बस फिर क्या मा, दोनों ने पौधे का इलाज शुरू कर दिया। नतीजा यह हुआ कि जिस पेड़ पर पांच साल में एक भी फल नहीं आया था, वह नींबू से लकदक हो गया।
डॉ. विकास और सुमन बीमार पौधों का इलाज करते-करते खुद किसान बन गए। देोनों ने उत्तर प्रदेश के पीलीभीत में अपना कृषि फार्म खोल लिया। यहां वे अलग-अलग प्रजाति के बीमार पौधों का इलाज करके कई किसानों की जिदगी बदल रहे हैं। फिलहाल दंपति साठ राज्यों के किसानों की फसलों को बीमारियों से बचाने में मदद कर रहा है। पीलीभीत निवासी डॉ. विकास अपने परिवार के साथ नॉर्थ सिटी एक्स्टेंशन कालोनी में रहते हैं। यह पानी डॉ. सुमन के साथ
बीडीए कॉम्प्लेक्स में होम्योपैथी क्लीनिक चलाते हैं। डॉ. विकास कहते हैं, 'हमारे घर के बाहर एक नींबू का पेड़ था। उसमें नींबू नहीं आते थे। बाजार में उपलब्ध हर खाद आजमाकर देखी, लेकिन पेड़ पर फूल नहीं आए।
होम्योपैथी से इलाज किया तो अगले ही मौसम में पेड़ डेरों नींबू से लद गया।' वह बताते हैं कि नींबू के पेड़ का इलाज करने के बाद उन्होंने अखबार में पड़ा कि रामगंगा किनारे सैकड़ों बीघा खेत में फैली मिर्च की फसल पर घुमना रोग लग गया है। यह पता पूछता हुए पीड़ित किसानों के पास पहुंचे। किसान फसल नष्ट करने की तैयारी कर रहे थे।
डॉ. विकास ने किसानों से गुजारिश की कि उन्हें केवल 15 दिन बीमार फसल का इलाज करने दें। किसान मान गए और नतीजे चौंकाने वाले थे। होम्योपैथिक दवाओं से घूमना रोग जाता रहा और मिर्च की बंपर पैदावार हुई। डॉ. विकास ने भुता में पेठा और रामगंगा किनारे बसे एक गांव में सरसों की बीमार फसल का इलाज किया।
मध्य प्रदेश के किसानों के लिए मसीहा बने
दकील डॉ. विकास, मेरे पास सभा प्रदेश के किसान आए। उनकी 4000 एकड़ में बोई टमाटर की फसल में कीड़ा लग गया था। मैने प्रयोग के तौर पर इलाज शुरू किया। कुछ ही दिनों में कीड़े मर गए। अब मेरे पास छत्तीसगढ़, गुजरात के किसान भी आ रहे हैं।
डॉ. विकास वर्मा और डॉ. सुमन वर्मा।
मैंने दस साल पहले होम्योपैथी से पेड़-पौधों का इलाज शुरू किया था। आज मैं दावे से कह सकता हूं कि यह बीमार पौधों के इलाज की सबसे कारगर विधि है। मैं इसे देश के हर किसान तक पहुंचाना चाहता हूं, वो भी निः शुल्क। डॉ. विकास वर्मा, কि
होम्योपैथी दवा सस्ती
पौधों की बीमारियां दूर करने के लिए इस्तेमाल हो रहीं होम्योपैथी की दव कीटनाशकों से कहीं सस्ती है। इनका पेड़-पौधों और इनसानों पर हानिकारक प्रभाव भी नहीं पड़ता। साथ ही पौधों की किसी भी बीमारी से लड़ा जा सकता है।
दो किलो के अमरूद वाले डॉक्टर साहब
फसलों के साथ अपने कार्म पर आम. अमरूद, पपीते और केले की खेती कर रहे डॉ. विकास को आम लोग दो किलो के अमरूद वाले डॉक्टर साहब के नाम से जानते हैं। वह बरेली मंडल में सबसे पहले बाईलैंड के अमरूद की डेढ़ से दो किलो वाली प्रजाति लेकर आए थे। होम्योपैथिक दवाओं की मदद से हम पौष्टिक अमरूद तैयार करते हैं।
